Sunday, 4 January 2015

ज़िंदगी अगर सरल होती !

ज़िंदगी अगर सरल होती ।
तो  तुम शायद आज पास होतीं ।

तब हमारा मिलना सहज होता  ।
यूँ  स्वप्न मिलान की विवशता न होती ।

मैं और तुम बातें करने में न झिझकते  ।
और न ही मिलने पर घेरते अपराधबोध  ।

बल्कि प्रसन्नता से हम डूबते उतराते  ।
दूर कहीं मस्त हिलोरों में खो जाते  ।

हम अपनी मंज़िल तलाश कर ।
अपना आशियाँ बसाते  ।

जिसमें गूंजती किलकारियां । 
दमकता तुम्हारा दीपशिखा सा सौन्दर्य ।। 
और हर्षित उल्हासित सा मैं। 

- संजय वर्मा 














1 comment:

  1. Great ! Bharate ... Kavi ho gaye ... Bharate !!!...

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